Friday, 11 September 2015

The Train Journey & Mysterious Misty....!!!

U know I had very comfortable journey.... Watching roads...urbanization... Fields and people working all around via my window of Indian railway.... It was amazing time. Had talks with people traveling with me today mrg. But u know yesterday night I was missing college life and places I was leaving... A lot...!! 


People say life moves on..... but i say memories never....!! 

And why memories are life... Then it's terrible...!! I opened my laptop in journey.... Started typing....u know mujhe sabdon ko kagaj me uker Dena bahot pasand hai....par train me MS word made it easy. 


Pata hai tumhe Indian railway is a place to learn human resources... Human psychology and human behavior etc. It was literally fun while traveling this time; Specially when I know traveling in railways are going to be rare in actual sense.


Pata h when I pick up ur call....in train... Phone rakhne par bagal wali aunty- achha...u r married??? 

And I replied- yes my wife called! But how did u get? 
She- arey samajh jata hai. Me- vo bacche ko dawae deni thi na to vae puchh rae thi ki de du...!! 

She- achha....kitne bachhe h aapke. 
Me- two...one boy one girl. After dinner time we had last good Night interaction.

It was morning;

One similar to my school time frnd was sitting in my compartment. I recalled....hmm....kya Nam tha....kya Nam tha....but I couldn't......I am so week in memory.... Names!!!


Then I was surprised.... If she was my school classmate then how she forgot me!! Not possible... No no awanish u r getting confused.... My conscious b mind told me!!!


Then guy besides her calls her- "Roshni"
Then dimag ki batti jali meri.....ooooooo ye to roshni hai!!!!

Tab na....as u know.... Mai muhfatt.... Man with no limits.... Directly... Bluntly asked that lady: hey roshni... Do U recall... Who am I???

(Qus like ....I m SRK and everybody shall know me.... But still..... It's common way in India when u meet an old frnd).


Roshni: hey awanish.... How can I forget u idiot....
Me: hey u remember me; so....

She: areyyyy was just thinking how many more hours u need to assemble ur guts to talk to me....soooo
Then she introduced a guy with her... He is Rohit my husband.... And this is Rashi...(7 months cute baby) in her arms.

Me: waoo wonderful..... Amazing....hey Rohit....very cute baby n rashi nice name.

She: soo when r u going to get married?? Or already!!!! No no no....I dnt think soooo.....!! Btw I m not in fb so not aware abt u!!! So bata na.... Tu bata.

Me: ettne sare questions...ek sath!!

Mere bagal wali aunty turant....2 cute bachhe bhi h sir k....dekho ab bhi jawan lagte hai....!!!

Ek gahera sannata us lady k answer k baad....!!!
Roshni was nor believing....(Btw aisa mera perception bas tha uske chehra dekh kar).


But she replied... Waah ...bahot bahot badhae....batao.   Bataya tak nae....bulaya nae!!! Tum bahot bure ho. (Halanki her husband's face was not cool with her attention in my personal life).
But still...meri kal ngt ki masti...2min ki....aunty k sath....2 mint ka jhooth Etna bada bill fadega pata na tha!!! Socha na tha.

Roshni and rohit had to go with next stop....and I couldn't reveal the truth.... As I was enjoying hiding it!!! Loving it.  !!!


*******Some truths and lies both needs to kept in secret.**********

Dar sa lagta hai abb to...

Gulshan-e-darbar me
jabse arzi khushiyo k liye lagae hai..

Rehmat etni mili Allah khair kare;

nazren na lag jaaye dar sa lagta hai ab to!!!!

Thursday, 10 September 2015

अफ़सोश नही.

तूने कितना कुच्छ सितम ना किया अये जालिम;
तुझे गम देने मे संतोष नही
और हमे वो सहने मे अफ़सोश नही...!!!

Monday, 7 September 2015

उसका नाम....!!

उसकी यादों के भी नखरे उठाता हू मै अये ग़ालिब,
सौक मे 2 घूँट जाम पिता था तब मै,
बोतलें लुढ़कता हू मै अब अये ग़ालिब....!!

कह गए थी याद ना आउन्गि तुम्हे नई मसूका मिलने पर,
पर आज भी अक्सर नए को उसके नाम से ही बुला लेता हू अये ग़ालिब...!!!

उसकी यादों के भी नखरे उठता हू मै अये ग़ालिब,
नए को उसके नाम से ही बुला लेता हू अये गॅलाइब...!!!

माशुका मेरी.....!!!!


ताल्लुक उसके तोड़ लेने पे हम अपना कसूर ढूढ़ने मे पड़े थे,
वो बेरहम जब डोली मे थी; हम जनाज़े की सैर मे थे!!!

गीली लकड़ी से किया था इश्क़ हमने ग़ालिब,
गीली लकड़ी से किया था इश्क़ हमने ग़ालिब,
ना पूरा जला पाए थे और ना अब बुझा पा रहे.
पढ़ कर अगर वाह वाह निकली हो दिल से--
वाह सुने सदिया हो गए लगता है मुझे
.
क्यूकी
वाह तो हम उनके हुश्न पर ही सुना करते थे.
सही सुना आपने-
वाह वाह तो उनके हुश्न पर ही सुना करते थे...
तुमने हालाँकि पुचछा नही की-
"सुना करते थे या खुद वाह वाह कहा करते थे?"


सुना करते थे....!!!
सुना करते थे फिर बोलने वालो को भी चुप करा दिया...
उस नूर परी को अपनी मसूका बना कर...!!

फिर मोहब्बत ना हो जाए.....!!!

दो लव्ज़ उनके सुन लू वापस,
इन्तेकाम ये इंतज़ार केवल इसी के खातिर,

दो लव्ज़ सुन लू उनके;
लीबाज़ उनकी पसंद के पहेन लू आज; उनकी मुस्कान के खातिर;
लीबाज़ उनकी पसंद के
इतनी बरकत करना की ये लीबाज़ उन्हे मोहब्बत ना करा दे हमसे;
और उनके दो लव्ज़ हमे उनका ना बना दे ये बरकत करना अये मौला.

वादे याद आज भी है....

गिर गये हम इतना तेरी बेवफ़ाई के मारे;
तेरी याद हालाँकि सलामत आज भी है;
तन्हाइयों मे कुच्छ बोतलों क सहारे;
साथ पिएँगे वो वादे याद आज भी है....!!

प्यार क्या है
प्यार क्या है सवाल किया था उसने;
प्यार क मोहताज होकर;
अब हम जवाब ढूढ़ पाए है साथियों!!
और जवाब भी यही की-

"प्यार लाजवाब है"

इश्क़ का हश्र....?

इतनी सिद्दत्त से की थी मोहब्बत,
तो ये हश्र हुआ अय ग़ालिब,
जिंदा-मौत से भी बड़ी कोए सज़ा होती है क्या??

दुआएँ मागने गया था उसके दर पर,
की मेरी भी उमर तुझे लग जाए;
क्यूकी जीते जी मरने छ्चोड़ गए वो हुमको,
कम से कम वो तो थोड़ा और जी जाय...!!!

कैसा नशा है तू मेरी हन...,,

कहने को दूर तो है तू,

पर यादों मे अब भी है!

मिलते नही हम अब,

पर सपने मे साथ सोते है!

साझा करना कुच्छ भी अब कैसे हो,

पर एक एक्सट्रा कॉफी तेरे नाम की पी लेते है!

अकेलेपन मे भी याद नए आती थी कभी तू,

पर अब भीड़ मे भी तन्हा महसूस करते है!

कभी बातें खत से करते थे,

अब खुद को भी खत लिखते है!

कभी तेरे जाने का गुम होगा ये सोचकर डर गये थे,

अब तू नही है ये हर पल जीते है हम!

तुझे बेतक देखने पर तू मना करती थी,

अब तेरी पिक्स को घंटो निहारते है.!

कैसा नशा है तू मेरी हन,

बोतलों मे भी नही उतरे पर नशे मे खुद को पाते है !!!

ग़मे ज़िंदगी...

2 पल की मौत को कोसने वालो,

असली आफ़त तो ये ग़मे ज़िंदगी ही है..

ना तो गुजरती है; और ना ही सवरती है!!!!

शायरी मे उतर लेती है ग़ालिब.......

मौकाए परस्ती अब
उनकी जगह उनकी यादें कर लेती है अये ग़ालिब...

मौकाए परस्ती अब
उनकी जगह उनकी यादें कर लेती है अये ग़ालिब...

महफ़िल मे शब्द नही मिलते पर....
सन्नतों मे वो शायरी मे उतर लेती है ग़ालिब......!!

ज़िंदा हू पर........!!!

तेरी उन अदाओं से था प्यार मुझे पर अब नही,
वो आवाज़ और कुच्छ अहसास भी....
पर अब नही ऐतबार उन पर भी...!!!

ताज्जुब बे कोहराम तो एस बात का हे की;
ज़िंदा हू पर ज़िंदगी से ऐतबार नही.!!



ज़िंदा हू पर ज़िंदगी से ऐतबार नही.!!

बोतलें....और वो...!!!


कुसूर-ए-मोहब्बत हम क्यू निकालें;
होश मे हम अब भी है ग़ालिब;
दो चार बोतलें अब असर नही करती!!

दर्द को मिटाने की दवा अगर एन्हि बोतलों मे ही है,
बोल लो उनसे ज़हर हमे वही आकर पीला दें तो अच्छा हे....

Sunday, 6 September 2015

न्यू ईयर-2015.....नया साल मनाउ...???


नया साल मनाउ...???

उजड़े इश् मन को कैसे मै सम्झाउ

आते जाते हर राह मे बीता साल बितौउ,

वो कहते हैं मई नया साल मनाउ..!!

उनकी चिता जलाकर आज पिच्छाले साल मनाउ

अब कैसे खुशी मनाउ...नया साल मनाउ....!!!

Sunday, 30 August 2015

आसपास.....संसार....!!

वो आज भी वही है,
रॅंच मात्रा का बदलाव नही,
सोचा था वक़्त के थपेड़े असर करेंगे,
गरम हवायों से सिकेंगे जब चहेरे,
तो बदलाव की धार फुटेगी....पर नही...!!

कुच्छ दो नौकाओं मे पैर रखने वाले लोग,
समझते नही सीधा सा लॉजिक,
गिर जाते है बीच मज़धार मे अक्सर,
फिर भी...बचपाना....करते है...!!

मंज़िल....!!!

लहरे रात हो या दिन कश्ती को च्छू ही लेती है,
ख्वाब समंदर मे डूबे हो तो फिर रूह कसक सहती है,
अरमान तो सोए ही होते है अक्सर ग़ालिब,
इरादों मे हो दम  तो मंज़िल कदम चूम ही लेती है.

तू नही है.....!!

अकेलापन बाटने दोस्त है,
पर अब ज़रूरत सी नही,

सुनसान रास्तों पर अब डर है ही नही,
आँखें बंद करो,
या गहरे पानी मे जाओ,
वो सब बीते लम्हे....

और तेरा साथ...
तेरे हाथ नही छ्चोड़ते मुझे अकेला;
तू नही है ये शायद
तेरे होने से बढ़कर है क्या?

मेरी नफ़रत....

शब्द नही मिलते पर जेह्न मे विचार आते है,
यादें आती है उनकी भले ही वो हमे नही मिलते है...!!
मेरी नफ़रत भी अब चाहत हुई है ,
दर्द है दिल मे पर उनके लिए बुरे विचार नही आते है...!!!

यादें तेरी.....

मुस्कुराने की वज़ह है उनकी यादें,
तो क्यू कहें यादों से की हमे सताना छ्चोड़ दें,
किसी और पर दिल लगाने दे और हमे रुलाना छ्चोड़ दे,
रुसवा हो जाती ह उनकी यादें अगर किसी और को च्छू भी लो अब भी तो,
किसी और क हो जाएँगे तो क्या पता हम मुस्कुराना ना छ्चोड़ दें.

उनकी यादों को दूर करना मेरे बस मे ऩही,
दूर करना चाहो तो जीना मुश्किल हो जाता है,.!!
और पास रखो तो लोग कहते हे हम जीना भूल गये है...!!

पहेल का लोचा.....!!!

पहेल का लोचा.....!!

वक़्त गुजर गया;
पर दोबारा मोहब्बत ना हुई,
वो भी चुप थे;
हमे भी सन्नाटे चीरने की हिम्मत ना हुई...!!
विचारों का ना मिलना तो;
एक कारण भर है रिश्ता तोड़ने को,

ना पहल तुमसे हुई...
ना पहल हमसे हुई.!!


उदारता, इंसानियत और सहयोग ... कलयुग है जनाब !! (002/365)

 एक बड़े उद्योगपति से मिलने गया .. घर के बाहर खड़ी लम्बी कारों से लोगों ने अनुमान लगाए थे  उनके बड़े होने के... बड़ी बड़ी बातों पर उनके तालियां ब...